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DA Hike पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: अब भेदभाव नहीं है; जानें किसे लाभ होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि रिटायर्ड पेंशनर्स और कर्मचारियों दोनों पर महंगाई का असर समान है।

महंगाई भत्ता

10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकारें अब पेंशनभोगियों और सेवारत कर्मचारियों को DA बढ़ाते समय भेदभाव नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए समानता का अधिकार बचाया। साथ ही पुष्टि की कि सेवानिवृत्त और सेवारत कर्मचारी महंगाई से “समान रूप से” प्रभावित होते हैं।

क्या है मामला ?

दरअसल, यह मामला 2021 का है। उस समय, केरल सरकार और KSRTC ने पेंशभोगियों के मुकाबले सेवारत कर्मचारियों के लिए कम महंगाई भत्ते सही ठहराने की कोशिश की। उनका मानना था कि वर्कर्स और पेंशनर्स अलग-अलग कैटेगरी में आते हैं, इसलिए यह एक नीतिगत मुद्दा था। उस समय कर्मचारियों को 14 परसेंट DA और पेंशनर्स को 11 परसेंट DR मिला। केरल सरकार और KSRTC ने कहा कि वे बराबर महंगाई राहत (DR) नहीं दे सकते क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति खराब है।

कोर्ट ने क्या कहा ?

शीर्ष न्यायालय ने केरल सरकार और KSRTC की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वित्तीय बाधाएं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो सकते। समानता का अधिकार, संविधान का चौथा अनुच्छेद, उनके बीच भेदभाव करता है। न्यायालय ने निर्णय दिया कि सेवारत कर्मचारी और पेंशनभोगी समान रूप से महंगाई का सामना करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट की निर्णय को सही ठहराया, जिसमें KSRTC को पेंशनर्स को भी महंगाई राहत की उसी समान दर देने का आदेश दिया गया था जो सेवारत कर्मचारियों को दी जाती है। कोर्ट के इस फैसले से केरल के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों, जो लंबे समय से सामन महंगाई राहत की मांग कर रहे थे, को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से KSRTC पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा क्योंकि अब उसे सामन दर से पेंशनर्स को DR देना होगा। बाद में बकाया रकम के भुगतान के लिए विस्तृत आदेश जारी किए जाने की उम्मीद है।

 

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